टॉम्स फ़्रेडमैन ने बारम्बार बल दिया है कि अगर ट्रम्प चुनाव में हार जाते हैं तो वह सत्ता नहीं छोड़ेंगे और अमरीका को गृहयुद्ध की आग में झोंक देंगे, क्योंकि उनके पास काफ़ी मात्रा में दक्षिणपंथी सशस्त्र गुट हैं जो उनकी वजह से हथियार उठा सकते हैं।
टॉम्स फ़्रेडमैन की बात की सच्चाई में कुछ दम नज़र आ रहा है क्योंकि एक्सपोस वेबसाइट ने जानकार सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि डोनल्ड ट्रम्प ने अपने निकटवर्तियों से कह दिया है कि वह जो बाइडन के मुक़ाबले में होने वाले चुनाव के परिणाम से पहले ही अपनी विजय की घोषणा कर देंगे।
ट्रम्प अब तक कई बार चुनाव में धांधली की बात भी कह चुके हैं और वह कह चुके हैं कि वह इस प्रकार के ड्रामे के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उनका मानना है कि पोस्टल मतदान में ज़बरदस्त धांधली हुई है और जो बाइडन पोस्टल मतदान द्वारा की सफल हुए हैं। ट्रम्प का कहना है कि डाक संस्था कोरोना संकट के काल में अमरीका की डेमोक्रेसी की मुक्तिदाता बन गयी है।

पोस्टल मतदान के विरुद्ध ट्रम्प ने इतनी बयानबाज़ी की कि अमरीका के अधिकतर नागरिकों में यह बात होने लगी है कि मतदाताओं के उपस्थित होकर मतदान करने की तुलना में पोस्टल मतदान में अधिक धांधली की संभावना पायी जाती है। चार साल पहले अमरीका के 60 प्रतिशत से अधिक वृद्ध मतदाता पोस्टल मतदान पर भरोसा करते थे जो अब घटकर 45 प्रतिशत हो गयी है।
अमरीका में दंगों और नरक के दरवाज़े खुलने का एक अन्य साक्ष्य यह है कि टेक्सॉस में जो बाइडन की चुनावी कम्पेन की बस को ट्रम्प के समर्थकों ने दौड़ा लिया और उसे शहर से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस दृश्य के वीडियो ने सोशल मीडिया पर काफ़ी सुर्ख़ियां बटोरीं और ट्रम्प भी इस मामले में पीछे नहीं रहे और उन्होंने तुरंत ट्वीट कर लिखा कि आई लव टेक्सॉस। ट्रम्प के ट्वीट से पता चलता है कि वे अमरीका में नरक का दरवाज़ा खोलने के लिए तैयार हैं।
ट्रम्प के प्रतिस्पर्धी जो बाइडन ने इससे पहले कहा था कि ट्रम्प के बेटे ने ट्रम्प के समर्थकों को उकसाया है कि वह यह काम करते रहें और उनके पिता के प्रतिस्पर्धी पर हमले करते हैं। इस घटना के बाद जो बाइडन ने टेक्सॉस में अपनी तीन रैलियों को रद्द कर दिया और अब एफ़बीआई का बयान आया है कि वह इस मामले की जांच कर रही है।

अमरीकी समाचार पत्र लॉसएन्जलेस ने एक बहुत ही ख़तरनाक रिपोर्ट जारी की है और कहा है कि अमरीकियों ने हालिया वर्ष के दौरान लगभग 1 करोड़ 70 लाख हथियार ख़रीदे हैं और उसने अपने रिपोर्ट में कहा है कि यह हथियार अमरीका के चुनावों को अशांत करने के लिए ख़रीदे गये हैं।
अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव में अब कुछ घंटे ही बचे हैं और वहां चुनाव बाद हिंसा की आशंका को लेकर पूरे देश में पुलिस सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं। हालात इतने गंभीर इसलिए हैं क्योंकि बीते दस महीनों में यहां 1 करोड़ 70 लाख से अधिक हथियार ख़रीदे जा चुके हैं जो अमरीका के इतिहास में रिकॉर्ड ख़रीदारी है। हिंसा और लूटपाट की आशंका को देखते हुए न्यूयॉर्क समेत कई राज्यों में दुकानदारों ने अपने स्टोर बंद कर दिए हैं।

बंदूक उद्योग संघ के सर्वे से पता लगा कि जनवरी से सितम्बर तक अमेरिका में 1 करोड़ 70 लाख से अधिक बंदूकें बिक गईं। एफ़बीआई ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि केवल 21 मार्च को देश में 2.1 लाख हथियार ख़रीदे गए। यह एक दिन में हुई बंदूक बिक्री का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है। पूरे महीने में 37 लाख बंदूकें ख़रीदी गईं जबकि 2019 में इसी महीने केवल 11 लाख बंदूक़ें बिकी थीं। ख़रीदारी में इलिनोइस राज्य सबसे आगे रहा। टेक्सॉस, केंटकी, फ़्लोरिडा और कैलिफ़ोर्निया में भी बड़ी संख्या में हथियार ख़रीदे गए हैं।
बंदूक उद्योग संघ के सर्वे के अनुसार अपनी सुरक्षा की चिंता में बंदूक़ खरीदने वालों में युवा, महिलाओं और अश्वेत समुदाय के लोगों की संख्या अधिक है। जनवरी से अप्रैल तक बंदूकों की जितनी बिक्री हुई, उसमें 40 प्रतिशत हिस्सा पहली बार के हथियार खरीदारों का था, जिनमें अधिकतर युवा हैं। महिलाओं में हथियारों की ख़रीददारी 40 प्रतिशत और अश्वेतों के बीच 58 प्रतिशत बढ़ गई है।
सुरक्षा एजेंसियों की नज़र उन राज्यों की सुरक्षा व्यवस्था पर है, जहां डेमोक्रेट अथवा रिपब्लिक समर्थकों का प्रभुत्व रहा है। ट्रम्प की हार की स्थिति में हिंसा फूटने की अधिक संभावना है। फ़िलाडेल्फ़िया राज्य सरकार ने हिंसा की स्थिति में सख़्त कार्यवाही के निर्देश जारी किए हैं। पेंसिल्वेनिया राज्य में वामपंथी कार्यकर्ताओं और दक्षिणपंथी सशस्त्र समूहों के बीच हिंसा की बहुत घटनाएं होने से इस राज्य में सुरक्षा बढ़ाई गई है। टेक्सास, फ़्लोरिडा, जॉर्जिया, ओरेगन राज्यों में ज्यादा सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

न्यू जर्सी, विस्कॉन्सिन, टेक्सास, फ्लोरिडा, जॉर्जिया, ओरेगन व अन्य राज्यों में नेशनल गार्ड इकाइयों को बुलाया जा रहा है। एजेंसियों को यह भी चिंता है कि अधिकतर सुरक्षाबल देखकर कहीं मतदाता दहशत में आकर मतदान करने ही न निकलें इसलिए सुरक्षाकर्मियों को सादी वर्दी में भी तैनात किया जाएगा।
एफ़बीआई ने हाल में कहा है कि देश में अचानक से हथियारबंद मिलिशिया गुटों का उदय हो गया और ऐसे गुट चुनाव के बाद हिंसा करा सकते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि अधिकतर गुट दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े हैं। एक स्वतंत्र मिलिशिया ग्रुप ट्रैकर संस्था का दावा है कि ये 70 गुटों का समूह है जिनमें से कई गुटों ने खुलेआम ट्रम्प का समर्थन किया है। ऐसे में चिंता व्यक्त की जा रही है कि ट्रम्प के न जीतने पर ये गुट हिंसा कर सकते हैं।
नेशनल शूटिंग स्पोर्ट्स फाउंडेशन के अनुसार 2019 के मुक़ाबले इस साल की पहली छमाही में अमेरिकी गोला-बारूद की ख़रीददारी में 139 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे नामी रिटेलरों के पास गोला-बारूद की कमी हो गई। कई जगह लंबी लाइनों में लगकर गोला-बारूद और हथियार खरीदने के दृश्य देखने को मिले जबकि बहुत अधिक मात्रा में ख़रीददारी की वजह से गूगल और अमेजन ने ऑनलाइन हथियार और गोला-बारूद की बिक्री बंद कर दी।

न्यूजर्सी ऑफ़िस ऑफ़ होमलैंड सिक्युरिटी के निदेशक जेरेड एम ने बताया चुनाव को लेकर ग़लत सूचनाएं प्रचारित की जा रही हैं जो लोगों को भड़काने का साधन बन सकती हैं। हम ऐसे पोस्टों पर नज़र रखे हुए हैं जबकि साइबर हमलों से निपटने की भी पूरी तैयारी कर ली गयी है। उन्होंने कहा कि जब एक राष्ट्रपति ही चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने लगे तो चुनाव परिणामों को लेकर आम लोगों को भड़काना आसान हो जाता है।
लूटमार और हिंसा के डर से कैलिफ़ोर्निया के बेवेर्ली हिल्स शहर में दुकानदारों ने अपने-अपने स्टोर बंद कर दिए हैं। कई दूसरे शहरों में भी अफ़रा तफ़री का माहौल है जिसे स्थानीय मीडिया द्वारा बड़े स्तर पर रिपोर्ट किया जा रहा है।
नेशनल शूटिंग स्पोर्ट्स फाउंडेशन के संस्थापक मार्क ओलिवा ने बताया कि अश्वेतों व अन्य अल्पसंख्यकों के हथियार खरीदारी में अभूतपूर्व वृद्धि दर्शाती है कि वे पुलिसिया कार्यवाहियों, नस्लीय हमलों, महामारी के कारण लगे प्रतिबंधों और चुनावी नतीजों के बाद की स्थिति को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।